कहते हुए उसने चूतड़ घुमाए और चूत से लण्ड दबोचा। दोनों स्तनों को पकड़ कर मुँह से मुँह चिपका कर मैं कमली को चोदते चला गया।धक्कों की रफ़्तार मैं रोक नहीं पाया। कुछ बीस-पच्चीस झटकों बाद अचानक मेरे बदन में आनंद का दरिया उमड़ पड़ा। मेरी आँखें ज़ोर से मुंद गई, मुँह से लार निकल पड़ी, हाथ पाँव अकड़ गए और सारे बदन पर रोएँ खड़े हो गए, लण्ड चूत की गहराई में ऐसा घुसा कि बाहर निकलने का नाम लेता ना था।लण्ड में से गरमा गरम वीर्य की ना जाने कितनी पिचकारियाँ छुटी, हर पिचकारी के साथ बदन में झुरझुरी फैल गई। थोड़ी देर मैं होश खो बैठा। जब होश आया तब मैंने देखा की कमली की टाँगें मेरी कमर के आस-पास और बाहें गर्दन के आसपास जमी हुई थी।मेरा लण्ड अभी भी तना हुआ था और उसकी चूत फट फट फटके मार रही थी। आगे क्या करना है वो मैं जानता नहीं था लेकिन लण्ड में अभी गुदगुदी हो रही थी। कमली ने मुझे रिहा किया तो मैं लण्ड निकाल कर बसन्ती के ऊपर से उतरा।बाप रे ! XXX Hindi कितना लंबा और मोटा है संतोष, जा तो, इसे धो के आ।मैं बाथरूम में गया, पेशाब किया और लण्ड धोया। वापस आकर मैंने कहा- कमली, मुझे तेरे स्तन और चूत दिखा। मैंने अब तक किसी की देखी नहीं है। उसने चोली घाघरी










