उनको क्या संतुष्ट कर पाते है?? तबसे दोस्तों मैं ९ १० बार चुपके ने अपने नन्दोई से चुदवा चुकी हूँ.अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- अँधेरे में जब तक समोसा आया सूरज मेरे होंठों पर ५ ६ बार चुम्बन ले चुके थे. XXX Hindi वरना मुझको उसने प्यार हो जाता और सायद मैं उनके साथ हमेशा के लिए बैठ जाती. मेरी होंठ भी पी रहे थे.उनका मोटा लंड मेरी बुर में बिलकुल फिट हो गया था. ऐसी ही एक शाम को मैं पल्लवी के पास अस्पताल में बैठी थी. ये मेरी पहली कहानी है. पर ये तो अंदर ही अंदर वात्सायन निकल थे चुदाई के बारे में इतना खुल के बात करते है, अद्भुत! अब तो मैं भी ठरकी हो चुकी थी.दोगी?? मैंने अपने दोनों पैर उपर हवा में उठा लिए. नन्दोई मुझको वहां खिंच ले गये.हम दोनों अब गद्दे पर लेट के रोमांस करने लगे. मैंने कहा.सलहज और ननदोई का ये हसी मजाक उस दिन से चलना शुरू हो गया. मैं भी अपने लेखपाल पति का वही पुराना लंड खा खाके अघा गयी थी. मेरी शादी के ९ महीने बाद मुजको लड़का हुआ था तो मेरी बड़ी नन्द पल्लवी भी आई थी. मैंने आँखे बंद कर ली थी.क्यूंकि हमारा ये मशीन और लंड का रिश्ता एक नाजायज रिश्ता था.















