तो तो किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि मैं ना तो फ़वाद भाई की रही और ना अदनान की। मुझे पता ही नहीं चला और कराची में मेरे अब्बू ने हमारे एक रिश्तेदार के बेटे हुमायूँ से मेरा रिश्ता तय कर दिया और मेरी मंगनी हो गई।अदनान, फ़वाद भाई ओर मैं शॉक में चले गए। खैर.. देखती हैं तो क्या हुआ… इसमें बुरा क्या है?उन्होंने कहा- बेवक़ूफ़.. XXX Hindi मैं यह क्या सुन रही हूँ?फ़वाद ने कहा- क्या हुआ?मैंने फिर उन्हें सारी बात बता दी तो वो बोले- यार मैंने फ़िरोज़ को मना किया था कि तुमसे बात ना करे लेकिन उसने पता नहीं क्यों ऐसा किया।मैंने कहा- वो छोड़िए.. मैंने मना किया और अब मैं अपने मंगेतर हुमायूँ से बातें करने लगी और उसको पसंद करने लगी। हालांकि मैंने हुमायूँ को नहीं देखा था क्योंकि वो कराची में था और मैं एबटाबाद में थी। हम मोबाइल पर बातें करते.. मैं मान गई..हालांकि वहाँ फ़वाद भाई भी थे.. मेरा सारा पानी अपनी चूत के अन्दर डालना और एक कतरा भी बाहर ना आने पाए…मैंने कहा- आआआह.. अब तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने अम्मी को बोल दिया और अम्मी ने मेरे चाचा को बोल दिया।सब फ़वाद भाई से नफ़रत करने लगे और हुमायूँ को भी जब पता चला तो वो भी फ़वाद भाई को कॉल या मैसेज करके गालियाँ देने लगा। फ़वाद की















