वो ट्रांसफर हो के आये थे. हिंदी XXX उनका पल्लू अभी भी गोदी मे गिरा हुआ था.मैं- आंटी एक बात बोलू आप बुरा तो नहीं मानोगी.आंटी – पहले तू मुझे वो किताब दिखा!!मैं- लेकिन आंटी मेरे पास वो किताब नहीं है वो तो दोस्त ने दिखाई थी, मेरे पास नहीं है.आंटी- तो तू कल उससे से मांग के ले आना.मैंने कहा नहीं ल सकता.आंटी – क्यों?मैं – वो गर्मियों की छुटियों मे गाँव गया है.आंटी- अच्छा कोई बात नहीं, तू क्या बोल रहा था लल्ला?मैं – आंटी मैं आपके मम्मे देखना चाहता हूँ.आंटी- क्यों?मै – मन कर रहा है देखने का..आंटी- अच्छा फिर तुझे भी एक काम करना पड़ेगा लल्ला…मैं- आप जो भी बोलो आंटी आपकी बात मैंने कभी टाली है.आंटी मुस्काई और बोली हां ये तो है लल्ला.मैं बोला आंटी जल्दी दिखाओ कंही पियुष ना आ जाये..आंटी- अच्छा दिखातीं हूँ.आंटी ने ब्लाउज के बटन खोलने लगी, ब्लाउज मे आगे की तरफ बटन थे आंटी ने सफ़ेद ब्रा पहनी थी, उन्होंने ब्लाउज के पुरे बटन खोल दिए, पर पूरा ब्लाउज नहीं उतारा, पर सफ़ेद ब्रा मे उसके गोरे गोरे बूब्स क्या मस्त लग रहे थे मन कर रहा था उन्हें मसल दूँ, आंटी बोली बस, मैं आंटी ये क्या पूरा दिखाओ ना. आंटी मुझे आप बहुत अच्छी लगती हो.आंटी- मुझमे ऐंसा क्या है.मै- पता नहीं पर आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो.हम दोनों बेड















