इसलिए मैं आगे तो बढा पर उस शख्श की ओर शक की निगाह से देखा.. मैंने मन बना लिया अब कुछ करना है… कुछ शर्तिया इलाज करानी है लौड़े की बीमारी का… और ऑफिस जाते जाते मैं ने पानवाले की तरफ अपनी कार मोड़ दी…कार मैंने पान दूकान के पास रोक दी, और उतर कर दूकान के पास गया…कुछ खास भीड़ नहीं थी, पर फिर भी कुछ लोग वहां थे.. XXX Hindi भारती ने कहा.. तुम भी खाओ न..” और मैंने भी अपने हाथों से उसे खिलाना शुरू कर दिया..एक निवाला वो मेरे मुंह में डालती, फिर दूसरा निवाला मैं उसके मुंह में… और दोनों एक दूसरे को देखते हुए धीरे धीरे चबा चबा चबा कर खा रहे थे.. मोहन ने मुझे देख लिया और एक हलकी मुस्कान दी और कहा “बस सर.. यह किसी भी angle से कॉल गर्ल नहीं लगती… एक दम घरेलू लगती है… और मन ही मन अपने मोहन पानवाले को दुआएं देने लगा.. पान का आनंद लेते हुए मैं घर वापस आ गया. ओर भारती की पूरी मस्ती उसकी चूत में समायी थी.. उसकी घुंडी और भी टाईट हो गयी.. चल बेटा प्रीतम सागर.. पर मेरे थूक लगे थे.. भारती चिल्ला उठी.. एक रोमांच सा दिल में होने लगा..जैसे तैसे काम निबटा क़र घर पहुंचा.हाथ मुंह धो कर फ्रेश हुआ.















