अब तो मीरा भी परेशान हो रही थी वो बोली, “बेवकूफ लड़की सोचा भी की अगर किसी को पता लग गया तो क्या होगा”?श्रृष्टि टस से मस होने के मूड में नहीं थी। बोली, “जीजी किसी को कैसे पता चलेगा। किसी को ना पता चले इसी लिए तो जीजू से चुदवाना चाहती हूं। इस कमरे के अंदर जीजू से मेरी चुदाई की बात हम तीनो में ही तो रहेगी। प्लीज जीजी मान जाओ, सिर्फ एक बार जीजू को चोदने दो मुझे”।जब श्रृष्टि नहीं मानी तो तो मीरा ने अपने माथे पर हाथ मार कर बोली, “अजीब मुसीबत है – क्या पागलपन है इस लड़की का”?और मीरा मुझ से बोली, “जाओ अरुण, चोदो इस पागल को बुझाओ इसकी चूत की प्यास, तोड़ो इस पागल लड़की की चूत की सील।”मेर लंड तो कुलबुला ही रहा था, मगर में मीरा की नाराज़गी मोल ले कर श्रृष्टि को नहीं चोदना चाहता था।मैंने कहा,” मीरा मैं तुम्हारी अधूरी चुदाई छोड़ कर उठा हूं जब तक तुम्हारी चूत की आग ठंडी ना कर लूं, मैं श्रृष्टि को नहीं चोद सकताI”मीरा को अब सच ही गुस्सा आ गया। “भाड़ में गयी मेरी आधी अधूरी पूरी चुदाई। कोइ आग नहीं लगी हुई मेरी चूत में। ठंडी हो चुकी है मेरी चूत की आग इस पागल श्रृष्टि की हरकतें देख कर”। मीरा श्रृष्टि की तरफ इशारा कर के बोली।मैंने कहा, “अगर















