गर्म देशी कामकाजी लड़की अपने साथी के साथ जंगली सेक्स करती हुई

क्या जीजू ने मेरे दिल की बात पहचान ली थी। मेरा दिल मचल उठा।रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे और दीदी की सिसकारियो और मस्त चीखों की आवाजें उभरने लगी थी। मेरा दिल मचल उठा। मैं जल्दी से उठी और उनके कमरे के दरवाजे की दरार में से झांकने लगी। जीजू दीदी की मोटी मोटी चूचियाँ दबा रहे थे, दीदी सिसकारियाँ भर रही थी।मेरे तो रोंगटे खड़े हो गये, अरे मर गई मेरे राम जी ! जोर से, मार दे यार !’‘ले छिनाल…चुद ले अब तू भी…याद करेगी कि तुझे तेरे जीजू ने चोदा था।’‘दीदी की तरह चोदो ना।’‘ओह तो तुम सब देखती हो…’यह कह कर वो जोर जोर से मेरी गाण्ड मारने लगा। इतनी देर में मेरी चूत फिर से उत्तेजित हो चुकी थी, मुझे उसी वजह से बहुत मजा आने लगा था। मैं अपनी टांगे बिस्तर पर फ़ैलाये उल्टी लेटी गाण्ड चुदवा रही थी। हाय राम ! हिंदी XXX चलो हटो, गुण्डे कहीं के !’जीजू मेरे ऊपर से धीरे से हट गये और बिस्तर पर ही बैठ गये। जीजू का कड़क लण्ड पजामें में से तम्बू की तरह खड़ा हुआ था। मुझे बहुत खराब लगा, सारी मस्ती चूर चूर हो गई थी। उनके खड़े हुये लण्ड से चुदने को पूरी तैयार थी। उनके इस तरह से हट जाने से मैं परेशान सी हो गई। पर मुझे क्या पता था कि आगे

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