जांघो का वो स्पर्श… जब मैं उसे उठाए हुए था… धीरे धीरे उसके जिस्म से मेरी छेड़ छाड़ बढ़ने लगी. XXX Hindi फिर हमारे मुख में जैसे बोल अटक गये. एक बच्चा डॅडी बनता…एक मम्मी बनती….और बाकी उनके बच्चे. और फिर मेरे गर्भ को भी सींच देना….मैं आपको अपने जीवन का पहला पुरुष मानकर अपने गर्भ मैं सबसे पहले आपके वीर्य की बूँद चाहती हूँ……आप दोगे ना?हां मेरी रानी….क्यों नहीं….तो फिर मैं आपके लंड के लिए अपना कौमार्य समर्पित करती हूँ….!पर आप प्यार से करना मेरे साथ….मैं कच्ची कली हूँ ना… मेरी चूत बहुत टाइट है… प्लीज़ धीरे धीरे चोदना मुझे मेरे राजा……मेरे दूल्हे… और वो मुस्कुराई.उसने फिर जल्द ही अपनी पॅंटी उतार दी और पूरी नंगी खड़ी हो गई… मेरे तने लंड के सामने. वो सिहर उठी.. वापस बेडरूम मैं आ गया, जहाँ वो लेटी थी.फिर यूँ ही खेल के कुछ और हिस्से चले… फिर शाम भी हुई घूमने गये… ऐसा करते करते हमारे खेल में रात आई… इस खेल के डिनर के बाद…? कितनी लकी हूँ मैं.. इसकी पूरी लंबाई को?ऊओ…हां…आप कहते हो तो…ज़रूर…पर ये बहुत मोटा है मेरे मुँह में जाएगा…?हां कोशिश तो करो…वो मेरी टाँगों से चिपक गई.















