मैं जानता हूँ की तुम्हारा एक मर्द के साथ चक्कर चल रहा है। तुम रोज उसके साथ जाती हो। सच है की नहीं? हिंदी XXX इतने लोग घुसे की तिल भर की जगह नहीं थी। संजय खड़ा भी नहीं हो सकता था। उसको मेरी और अपनी कमर आगे करनी पड़ रही थी क्यूंकि पीछे से उसको ऐसा धक्का लग रहा था।जैसे तैसे ट्रैन चल पड़ी। संजय और मैं ऐसे भीड़ में चिपके हुए थे की जैसे हमारे दोनों के बदन एक ही हों। संजय का लण्ड मेरी चूत को इतने जोर से दबा रहा था की यह समझ लो की अगर कपडे नहीं पहने होते तो उसका लण्ड मेरी चूत में घुस ही जाता। संजय की छाती मेरे स्तनों को कस कर दबा रही थी।मैंने महसूस किया की मेरे बदन का सहवास पाते ही संजय का लण्ड खड़ा हो रहा था। कुछ ही देर में तो वह लोहे की छड़ की तरह खड़ा हो गया था। और क्यूँ ना हो? बोलो?”मेरे पति ने अपनी कमजोरी छिपाने के लिए मुझपर इतना बड़ा इल्जाम सहज में ही लगा दिया, यह बात सुनकर मेरे पाँव के निचे से ज़मीन खिसक गयी। मैं कितनी मुश्किल से अपनी रातें गुजार रही थी। और मेरे पति ने एक ही झटके में मुझे एक पत्नी से राँड़ बना दिया!जो काम करने के बारे में मैंने सोचा भी नहीं था, उसका दोषा-रोपण










