आपके पास भी तो था ना?जूही- ये मैं तुम्हें सर्प्राइज देने वाली थी, और वैसे भी इसी बहाने आपको दूसरी औरत के चूचे का मजा भी देना चाहती थी।मैं- “भाभी, आप मेरा कितना खयाल रखती हैं…” और ऐसा बोलकर मैं फिर उनका दूध पीने लगा।उधर रसीला भी ये सब देखकर गरम हो गई थी, वो हमारे बाजू में आई और बोली- “कम पड़े तो बोलना, इसमें फिर से भर गया है…”मैं- “वाओ… मुझे आज घर पे खाना नहीं पड़ेगा, ऐसा लगता है…” बोलकर मैं कभी जूही के और कभी रसीला के चूचे चूस रहा था। इतना दूध तो मैंने अपनी माँ का भी नहीं पिया होगा। दोनों की 36” की चूची पूरा दूध से भरी थी, और मैं उसे चूस-चूस के खाली कर रहा था। दूध का टेस्ट एकदम मीठा और थोड़ा साल्टी था।तभी जूही ने बोला- “मजा आ रहा है ना देवरजी?” और ऐसा बोलकर मेरे मुँह में ली चूचियों को खुद दबा-दबा के मुझे पिलाने लगी, जिससे निपल से निकलती हर पिचकारी मेरे मुँह में गुदगुदी कर रही थी।मुझे लगा की मैं सारी उमर बस दूध ही पिता रहूं। और मैं जूही भाभी की चूत में उंगली डालकर उसे छेड़ देता तो उसकी ‘आह्ह’ निकल जाती। थोड़ी देर बाद जब दूध पी लिया तो भाभी बोली- “चलो अब चलते हैं, बाकी घर जाकर करेंगे…”रसीला भी नहाके बाहर निकल गई, अपने















