टीवी से मुँह क्यों फेर लिया???’ मैंने हँसते हुए पूछा.“…..नही मुझे लाज आती है!!” सोना बोली.“क्यों….???” मैंने मजा लेटे हुए पूछा.“….पता नही! वो दिन कब आएगा जब इस फुलझड़ी की चूत में लंड डालने का सौभाग्य मुझे मिलेगा!!”मैं खुद से यही बार बार कहता था। फिर दोस्तों सोना हर दोपहर मेरे घर रमेश काका [हमारे ड्राईवर] का टिफिन लेकर रोज आने लगे। एक दिन उसे बाजार में कुछ लड़के छेड़ रहे थे। तो मैंने उन लड़कों से लड़ाई कर ली और सोना को बचा लिया।उसके बाद से हम दोनों की जान पहचान और गहरी हो गयी। एक दिन मेरे घर ५०” वाला led टीवी आया था जो खासकर मेरे कमरे में पापा से लगवाया था। दोपहर में जब सोना रमेश काका का टिफिन लेकर आई तो मैंने उसे टीवी दिखाने के लिए अपने कमरे में ले गया।सोना नहा धोकर आई थी। उसके बाल अभी भी गीले थे। सोना का अनचुदा बदन बहुत जादा भरा हुआ था। उसके बस एक नजर देखते ही मेरा लंड क़ुतुब मीनार बन जाता था और उस कड़क माल को चोदना चाहता था।“बहुत सुंदर टीवी है अवधेशकुमार!! XXX Hindi टीवी से मुँह क्यों फेर लिया???’ मैंने हँसते हुए पूछा.“…..नही मुझे लाज आती है!!” सोना बोली.“क्यों….???” मैंने मजा लेटे हुए पूछा.“….पता नही! उसने नजरे उठा दी तो लगा की जैसे दिन हो गया हो और सुबह हो गयी हो। चुदाई की















