भारतीय गर्मी की एक कामुक सौतेली माँ, पहला भाग

भाभी के स्वागत की तैयारी कर लेना।हँसते हुए बोला- मैंने तो कर ली है। तुम क्या तोहफ़ा ला रही हो मेरे लिए।मुस्कराते हुए बोली- दो संतरे ला रही हूँ।देवर हँसते हुए बोला- चूस चूस कर खाऊँगा, जल्दी लेकर आओ।सर्वेश बोला- कल मुर्गा खाओगी या आराम से दो दिन बाद खाओगी?मैं हँसते हुए बोली- मुझे मुर्गे की आवाज़ आ रही है। कुँकङु कूं कुँकङु कूं बोल रहा है। अभी इसे सुला दो आकर बताउंगी की कब खाना है।फ़ोन पर बातें करने के बाद मैं अपनी चूत सहलाती हुई सो गई। अगले दिन मैं शताब्दी से हरदोई पहुँच गई, सर्वेश मुझे लेने आया था, उतरते ही उसने मुझे गले लगाया और बोला- घर पर अच्छी तरह से गले मिलूँगा, मुझे आप से मिलकर बहुत ख़ुशी हो रही है।मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और हम लोग बाहर आ गए। सर्वेश की बाइक से हम उसके घर पहुँच गए। वहाँ उसकी 35 साल की मकान मालकिन रजनी ने मेरा स्वागत किया और हम लोगों के लिए चाय-नाश्ता ले आई। हम सभी ने चाय पी, इसके बाद रजनी बोली- जाकर फ्रेश हो लो जब तक मैं बच्चों को देख लेती हूँ। आज रात को मेरे साथ सोना, इस नालायक का भरोसा नहीं, रात को सोने भी न दे।मैं सर्वेश के साथ उसके ऊपर वाले किराए के टू-रूम सेट में आ गई। कमरे की एंट्री बाहर और अंदर

भारतीय गर्मी की एक कामुक सौतेली माँ, पहला भाग

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