फिर बगल की सीट पर लेटी आंटी की बेटी की चुदाई शुरू हो गई थी, क्योंकि उसकी सिसकियाँ में साफ सुन सकती थी.और रितिका ने अंकल के लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और उसे बड़े मज़े लेकर चूसने लगी, जबकि मुझे कंडक्टर का लंड चूसने में ज्यादा मज़ा नहीं आ रहा था, लेकिन में क्या करती? लेकिन अब एक प्रोब्लम थी कि अंकल इतना घबरा गये थे कि अब वो रितिका से थोड़े दूर हटकर ही खड़े हो गये. हिंदी XXX उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थी. “Randiyo Ke Jaise Sex”उसे अंकल ने ऊपर उठा रखा था और वो भी उसकी चूत चूस रहे थे और पीछे खड़ा आदमी उसके चूतड़ को चूम रहा था. फिर धीरे-धीरे जब अंकल ने देखा कि में कुछ नहीं कह रही हूँ और ना ही में दूर हटकर खड़ी हुई तो उनकी हिम्मत बड़ गई और उन्होंने अपनी पूरी हथेली मेरे चूतड़ पर रखकर मेरे चूतड़ को सहलाना शुरू कर दिया में चुपचाप खड़ी रही.तभी मैंने देखा कि वो आंटी भी रितिका की जांघों को अपनी कोहनी से रगड़ रही है, लेकिन रितिका इतनी दुखी थी कि उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. उसकी ब्रा कंडक्टर ने उतार दी थी और वो अब उसके बूब्स को चूस रहा था और स्कर्ट भी कुछ ही बची थी.















