चलता रहता था।जेठ जी धीरे-धीरे मुझसे बेतकल्लुफ होने लगे। मुझे मुस्कराकर देखते, नर्म व्यवहार करते। घर में फल-फ्रूट जो भी लाते ‘नादिरा… नादिरा’ कहकर मेरे हाथ में ही थमाते, उस समय हाथ छू लेते…. XXX Hindi थका-थका कर मुझे बेहाल कर दिया। उनसे पाये आनन्ददायक सुख को मैं जीवन में कभी भूल नही सकती। अगले चार दिनों तक सुबह-शाम घण्टे-दो घण्टे जिन्नात उतारने के बहाने वह मुझे कोठरी में ले जाते और सम्भोगरत होकर मेरी नस-नस ढीली कर देते।अब कहां को भूत, कहां का जिन्नात….। मैं पूर्ण स्वस्थ हो गयी क्योंकि मुझे जिस मर्ज की दवा चाहिए वह मिल गयी थी। एक दिन आनंद की क्षणों में मैं शाह साहब से बोली, ‘‘मैं आप पर मर मिटी हूँ…. मुस्करा देते। वक्त गुजरता रहा, एक दिन मैं जेठ की दिवंगत पत्नी के छोटे बेटे जावेद को गोद में लेने के बहाने उन्होंने मेरी बाहें थाम ली।क्योंकि जावेद मेरी गोद से नही उतर रहा था। उनकी इस बेतकल्लुफी से मुझे लगने लगा था कि किसी-न-किसी दिन वह मुझसे कुछ करके ही मानेंगे। उधर मेरे शौहर अबरुद्दीन की हालत यह थी कि मर्दाना ताकत की दवाएं खाकर भी पूरा मर्द न बन पा रहा था। कभी मेरे दिल में जेठ के लिए बेईमानी आ जाती तो, मैं अपने आपको संभाल लेती थी।मेरे शौहर की नौकरी एक सप्ताह दिन, एक सप्ताह रात शिफ्ट में चलती रहती थी। जेठ















