मेरे मुँह से निकल गया।मेरा हाथ खुशबू भाभी के भोसड़े में किसी मशीन की तरह अंदर बाहर होने लगा। भाभी जन्नत के मजे लूटने लगी। साली खूब चुदवाई थी, तभी तो भोंसडा इतना बड़ा हो गया था। खुशबू भाभी को अपने हाथों से खूब चोदने के बाद मैंने अपना हाथ निकाला। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मेरा हाथ, पाचों उँगलियाँ खुशबू भाभी के प्रेम रस से तर थी। मैंने उनको उन्ही का रस चटाया। वो शहद की तरह अपना रस चाटने लगी। मैंने उनके चेरहरे पर हर जगह उनका प्रेम रस मल दिया। खुशबू भाभी मस्त हो गयी। मैंने अपना बड़ा सा गधे जैसा लण्ड खुशबू भाभी के बड़े से भोसड़े पर रखा और धच्च से पेल दिया उनकी गहरी चूत में।और उनको चोदना शूरु किया। चुदाई सुरु होते ही भाभी को शांति मिलने लगी। जैसे दवा खाने पर मरीज को आराम मिल जाता है। मैं दनदन उनको चोदता ही रहा। भाभी के बदन की आग खत्म होने लगी। उन्होने मुझसे बाँहों में कस लिया। अपने चिकने गुलाबी गोर पैर मेरे पीठ पर कस दिए। उन्होंने मुझसे गले से लगा लिया। मैंने भी उनको गले में कस लिया और घण्टों चोदा। उस रात खुशबू भाभी को मैंने 5 बार चोदा। उनको मैंने तृप्ति दी। मैंने उनको चरम सुख दिया।दोस्तों, एक साल पहले मैंने जो रसगुल्ला देखा था















