मैं झड़ भी चुकी थी… इसलिये ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी। उसने मेरे बोबे फिर से खींचने चालू कर दिये। मेरी चूंचियाँ जलने लगी थी। लग रहा था जैसे मेरी गाण्ड में किसी ने गरम लोहे की सलाख डाल दी हो…पर जल्दी ही दर्द कम होने लगा… मेरी सहनशक्ति काम कर गई थी। अब मैं उसके लण्ड को झेल सकती थी। मैं फिर से गरम होने लगी थी। उसकी गाण्ड चोदने की रफ़्तार बढ चली थी। “मैं मर गया… रजनी… मै… मैं… गया… हाय…” उसने अपना लण्ड गाण्ड से बाहर खींच लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.अचानक ही गाण्ड में खालीपन लगने लगा। मैं उसका लण्ड पकड़ कर जोर से दबा कर मुठ मारने लगी… उसके लण्ड में एक लहर उठी और मैंने तुरन्त ही लण्ड को अपने मुख में प्यार से ले लिया। एक तीखी धार मेरे मुख में निकल पड़ी…फिर एक के बाद एक लगातार पिचकारी… फ़ुहारें… मेरे मुख में भरने लगी… मैंने सारा वीर्य स्वाद ले ले कर पी लिया… और अब उसके लण्ड को मुँह से खींच खींच कर सारा दूध निकाल रही थी। कुछ ही देर में वो मेरे पास पड़ा गहरी सांसे ले रहा था।मैंने भी अपने आप को संयत किया और उठ कर बैठ गई। अपूर्व भी उठ कर बैठ गया था। जैसे ही हमारी नजर सामने उठी… हम















