भारतीय सौतेले परिवार की गर्म कहानी: देसी चुदाई का मजा

यह पहला मौका था जब मैं उसके साथ अकेला था.मैं थोडा घबरा भी रहा था कि मैं उत्तेजनावश कुछ ऐसा न कर बैठूं जिससे वो नाराज़ हो जाए. उसके मांसल और सुडौल चूतड़ मेरी आंखों के सामने नुमाया हो गये. XXX Hindi शायद लंड के स्पर्श से उसे मेरे नंगेपन का एहसास हुआ. तुमने ठीक किया कि तुम मेरे पास आये हो. मुमताज की पीठ मेरी तरफ थी. तुम्हे और वक़्त चाहिए तो…?“जो काम अभी हो सकता है उसमे देर क्यों करें?” मुस्तफा ने मेरी बात पूरी होने से पहले ही जवाब दिया. अब चिड़िया पर मेरे जाल की पकड़ मजबूत हो गई थी.जब मुमताज अपने ओर्गज्म से उबरी तो उसने प्यार से मुझे देखा. मुझे अफ़सोस है कि मैं आपको मंजिल तक नहीं पहुंचा सकी. चूतड़ों को चाटते-चाटते मैंने अपने कपडे भी उतार दिये. मेरी रग-रग में एक मदहोश कर देने वाली लज्ज़त का तूफान उठ रहा था. मैं कभी उसके पीछे होता और उसे चलते हुए देखता तो उसके लरजते, थर्राते और एक-दूसरे से रगड़ते नितम्ब देख कर मैं तमाम तरह की नापाक कल्पनाओं में खो जाता!कुल मिला कर कहा जा सकता है कि मुमताज जैसी हसीन औरत बनाने के पीछे ऊपर वाले के दो ही मकसद रहे होंगे – पहला, कमबख्त मुस्तफा की ख्वाबगाह को जन्नतगाह बनाना और दूसरा, बाकी सब मर्दों के ईमान का इम्तेहान लेना.

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