बहुत मजा आया.. हिंदी XXX लेकिन छोड़ने वाली क्या बात है.. और हॉल पूरा सज़ा हुआ था। मैं उनको इस रूप में देखकर मुस्कुराया और जल्दी से अपने कमरे में जाकर तैयार होकर आ गया। अब मैं वापस हॉल में आ गया। मैंने जींस और कुर्ता पहन रखा था.. तो मैं भी मौका देख कर उसके पीछे से चला गया और उसको पीछे से पकड़ लिया।सविता- क्या कर रहे हो.. तो उनकी चूत सामने दिखने लगी और बिना बाल का पूरा साफ़-सुथरी गुलाबी चूतें मेरे नज़रों के सामने थीं।तभी मैं दीदी की चूत की तरफ़ बढ़ने लगा और उसकी चूत को चाटने लगा तो बबिता भी दीदी की जाँघों को सहलाने लगी और दीदी की चूचियों को चूसने लगी। मैं इधर चूत को चूसता रहा और बबिता दीदी की चूचियों को दबाने लगी.. तभी अचानक उसकी चूत ने एक जोरदार पानी की धार छोड़ दी.. वैसे ही बात करेंगे।सविता और बबिता- ओके मेरे पतिदेव।मैं- अच्छा मेरी दोनों बीवियों.. जिसको पकड़ कर दीदी बोली- अरे वाह.. जैसे किसी पोर्न मूवी में लंड चूसते हैं। मैं तो अन्दर तक हिल गया था.. तो बबिता ने मुझे अपने पास बुलाया।मैं- क्या हुआ?बबिता- कुछ नहीं.. तो चूचियाँ उसके सिर की तरफ़ को उछलती थीं और फिर से नीचे की तरफ़ को आ जाती थीं। नीचे से उसकी चूत में मेरा लंड तो अपना काम कर ही रहा था..















