तभी भावेश ने मुझे पीछे से जकड़ लिया और मेरे कंधे को चूमते हुए मेरी एक टांग को उठा कर टेबल पर रख दिया और मेरी चूत को सहलाते हुए वो मेरी चूत में उंगली करने लगा।मेरे हाथों की माला ने भावेश को जकड़ लिया और आंख बन्द करके जो वो कर रहा था, उसका आनन्द लेने लगी। कुछ देर में मेरी चूत के अन्दर का पानी बाहर निकलने लगा और भावेश की उंगली गीली होने लगी, उसने अपनी उंगली निकाल कर मेरे मुँह में घुसेड़ दी। खारी नमकीन सी उसकी उंगली मेरे मुंह के अन्दर थी और भावेश के बोल मेरे कान के अन्दर थे,वो कह रहे थे- लो, अपना पानी चखो! हिंदी XXX बड़ा स्वादिष्ट है।मैं उसकी तरफ घूमी और उससे पूछा- तुम्हें कैसे मालूम?तो बोला- जान, तेरे को स्वाद दिलाने से पहले मैंने इसका स्वाद लिया है और अब मैं इसका पूरा स्वाद लूंगा।कहकर मुझे उसने थोड़ा नीचे किया, इस प्रकार झुकाया कि मेरी चूत और गांड के छेद उसे साफ-साफ नजर आने लगे। फिर वो बैठ कर मेरी चूत से निकले पानी को चूसने लगा और बीच-बीच में मेरी गांड को भी चाटने लगा। उधर मैं भी शीशे से अपने आप को देख रही थी।मेरी उठी हुई चूची भावेश के हाथ में कैद थी और जैसा भावेश चाहता वैसा ही मेरी नाजुक चूचियों के साथ करता। कुछ देर ऐसा करने















