पापा भी उठ गाए और उठे ही मुझे अपने जिसम से चिपेट कर किस करने लगे.“पापा मुझे पी आ रही हे”.“मुझे भी आ रही हे जानू”.चलो आओ मेरे साथ बाथरूम मैं.पापा से चुड़वाने वाली बात और थी. हिंदी XXX बात रूम का पूरा वाइल टाइल्ड फ्लोर मेरे यूरिन से गोलडेन हो रहा था.पापा ने फिर मेरा हाथ पाकर कर मुझे अपने ऊपेर गिरा लिया. मैं पापा की गौद मैं बंदरिया की तरह लिपटी हुई थी. यहाँ तक के मेरी चूत को भी आराम से और मुझ से पूछ पूछ कर चोदा, ताकि मुझे दर्द ना हो, तकलीफ़ ना हो. मेरे गोलडेन कलर की गरम पेशाब की फुल तेज़ धार पापा के चेहरे पेर पार्टी हुई उनके मुँह मैं गई.मुझे पापा के हलाक़ से गर्र्र्र…गर्र्र्र…ग.र.र.र.र.र की आवाज़ आई, और पापा का खुला हुआ मुँह मेरे पेशाब से पूरा भर गया, बुलके उनके होंटो के किनारों से मेरा पेशाब झाग की शकल मैं बह रहा था. मेरी चूत के दाने से लंड की टोपी जुब टच होती तो मैं बुरी तरह मज़े मैं काँपने लगती.“छोदिए ना पापा…. पेशाब मुझे भोथ ज़ोर से आ रहा था. मुझे अपने पापा पेर बे हुड प्यार आ रहा था, जिन्होने एक ही रात मैं अपनी बेटी को काली से फूल बना दिया था.















