क्या इन्हें औरत की कमी महसूस नहीं होती होगी, तुम तो एक हफ्ते में पागल हुए जा रहे थे…”शाहिद हँस दिया और बोला- “जिसके पास तुम जैसी हसीन बीवी हो वो एक हफ्ते क्या एक दिन में ही पागल हो जाएगा। मैं बहुत खुशनशीब हूँ की तुम्हारे जैसी खूबसूरत लड़की मेरी बीवी है…”अब हँसने की बारी शाजिया की थी। वो हँसती हुई बोली- “इतनी भी खूबसूरत तो नहीं हूँ..शाहिद ने उसे पीछे से पकड़ लिया और बोला- “तुम माल हो, मस्त माल… गोरा चिकना बदन तुम्हारी चिकनी पीठ, फिसलती हुई कमर और गौरी मुलायम छाती को देखकर मेरा लण्ड कई बार टाइट हो जाता है। मैं तुमसे दूर होकर तो पागल हो ही जाऊँगा..”ऐसी तारीफ सुनकर शाजिया गई। रात को शाजिया शाहिद को बोली- “कल हम शंभू चाचा को अपने यहाँ खाना खिलाएंगे, रात में। तुम कल उन्हें बोल देना। जो इंसान इतने सालों से अकेला है, खुद से सब कुछ कर रहा है, उसे हम कभी कभार लंच या डिनर तो खिला ही सकते हैं। वैसे भी वो हमारा मकान मालिक है और जब से हम आए हैं, तब से एक बार भी हमने उन्हें अपने घर नहीं बुलाया है…अपने पड़ोसियों, दोस्तों और रिश्तेदारों से अच्छे रिश्ते बनाना, मिलना जुलना, खाना खिलाना शाजिया और उसकी परिवार की आदत में शुमार था। लेकिन जब से शाजिया यहाँ आई थी तो वो अपने















