भाभी के चुच्चे तो और भी ज्यादा मजेदार हैं.संजय: चल भाई आज भाभी के दूध को पीते हैं.मेरी ब्रा को संजय ने निकाल दिया। मेरे दोनों बूब्स आजाद होकर झूलने लगे। बिक्रम और मोनू दोनों में मेरे एक एक बूब्स को पकड़ कर पीने लगे। मक्खन की तरह मुलायम दोनों चुच्चो को पी कर वो दोनों मजा काट रहे थे। मेरी तो जान निकल जाती थी जब वो दोनों मेरे निप्पल को अपने दांतो से पकड़कर खीचते थे।मै“……अई…अई….अई……अ ई….इसस् स्स्स्…….उ हह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की आवाजे निकाल कर अपने होंठो को काट रही थी। वो दोनो मेरी आवाज के धुन पर ही जैसे पी रहे थे। मै जितनी जल्दी आवाजे निकालती उतनी ही तेजी से वो दोनों मेरा दूध पी रहे थे।दोनों ने एक साथ सब करना शुरू किया। संजय और मोनू दोनों ही खड़े होकर अपना अपना पैंट खोलने लगे। दोनों का औजार बहोत ही बड़ा लग रहा था। मै बैठी हुई थी। वो दोनो मेरे सामने अपना अंडरवियर उतार रहे थे। मेरे मुह के आमने सामने ही उन दोनो का लंड उपस्थित था।अंडरवियर के निकलते ही उन दोनों के साँड़ जैसा लंड दिखने लगा। वो दोनो अपने हाथो में लेकर हिला रहे थे। मै बहोत खुश हो रही थी। इतने दिनों की तड़प दो साँड़ जैसे लंड वाले इंसान मिटाने वाले थे। मैंने दोनो के लंड को हाथ में पकड़ा। संजय का लंड















