पेंट में उसका लंड तम्बू बना देता है.प्रतिमा कुछ सेकंड्स के लिए रिशु की आँखों में आँखें डाल कर देखती है जब उसके होंठ रिशु के होंठो के साथ लगभग टच कर रहे होते हैं. सुबह जब मैं तुम्हारे कमरे में आई थी, जब…जब तुम्हारी ज़िपर में…” प्रतिमा को समझ नहीं आ रहा था कि रिशु जान बुझकर अनजान क्यों बन रहा है.“मम्मी मुझे कुछ याद नहीं पड़ता, सुबह क्या हुआ था, मुझे तो आपकी बात ही समझ नहीं आ रही”, रिशु का स्वर पहले की तरह प्लेन था. हिंदी XXX प्रतिमा बेटे के कमरे से निचे आकर टेबल पर नाश्ता लगा रही थी. मगर जैसे जैसे रिशु उसकी और बढ़ता वो दूर होती जाती. पगार अच्छी होने की वजह से वो किसी काम से इन्कार नहीं करता था, इसीलिए इस बार जब दुसरे शहर में चल रहे किसी प्रोजेक्ट के लिए कंपनी को एक इंजिनियर भेजना था तो सिर्फ वही राजी हुआ था बाकी सब बहाने बनाने लगे.उसकी मेहनत और काम के लिए इमानदारी को देखकर कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने उसे आश्वासन दिया था कि उसकी पगार में जल्द ही इज़ाफा किया जायेगा. उसने अपने बेटे का लंड चूसा था.















