मैं भी ऐसा हो चाहती हूँ। आज तुम मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ डालो!! हिंदी XXX क्यों मुझे तडपा रहे हो!!” माँ बोलीउसके बाद सर ने माँ को अपनी माशूका की तरह अपने से चिपका लिया और ब्लाउस पर हाथ रखकर दबाने लगे। माँ तो पहले से बड़ी चुदक्कड औरत थी। उनको भी मजा आने लगा और जैसे ही सर उसकी रसीली 36” की चूचियों को मसलने लगे.माँ ……अई…अई….अई…..इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह…. करने लगी। सर ने बैठे बैठे की माँ का ब्लाउस खोल दिया। मैं खिड़की से सब करतूत देख रही थी। सफ़ेद ब्रा में माँ की चूचियां कितनी सजीली और चुस्त दिख रही थी।“जान!! अंकल को बाय करो!!” माँ कहती.तो मुझे भी बाय करना पड़ जाता। माँ खूब पैसा पाती और मेरे लिए नये नये कपड़े जूते मोज़े खरीदती। कुछ दिन बाद हम भाई बहन के लिए वो कोई मास्टर ढूढने लगी। फिर कुछ दिनों बाद एक अच्छा मास्टर मिल गया।अब वो रोज ही हम लोगो के घर आकर पढ़ाने लगा। धीरे धीरे मेरी आवारा चुदक्कड माँ की दोस्ती उस टीचर से कुछ जादा ही हो गयी। उसका नाम बृजेश शुक्ल था। हम सभी उसे बृजेश सर कहकर बुलाते थे। वो भी बड़ी अच्छी तरह से पेश आता था।“कैसी हो आंटी जी?? कल रातभर तुम्हारी याद करके चूत में ऊँगली करती रही” माँ बोली.“ऊँगली क्यों की। मैं तो आज तुमको चोदने आ ही रहा था” बृजेश सर















