आपसे मिलना है. XXX Hindi और कुछ नहीं पसंद आया साहेब को?हम फिर हँस पड़े.मैं – बता दूँ?वो – बता दो ना.मैं – तो सुनो. पूरे रूम में चुदाई की आवाज ही गूंज रही थी. इतनी तस्सली आज तक नहीं हुई.मैं – जानेमन असली काम तो बाकी है.वो थोड़ा शरमा गयी. मैंने चूत चाट चाट कर उसका पानी निकाल दिया और उसकी मलाई उसकी छोटे से छेद के बाहर आकर चमकने लगी.वो बोली – मेरा कई बार हो चुका है. और कुछ नहीं पसंद आया साहेब को?हम फिर हँस पड़े.मैं – बता दूँ?वो – बता दो ना.मैं – तो सुनो. और अभी वह इस लण्ड को महसूस ही कर रही थी कि मैंने अचानक से बिना बताये अपना घोड़ा उसके छोटे से सूराख में घुसा दिया. मतलब श्रावस्ती काफी मजाकिया नेचर की प्रतीत हो रही थी.मैं – हाँ यह तो नाइंसाफी है. उसने तुरंत मेरी शर्ट निकाल कर मेरा अंडरवियर निकाल दिया. खजाना और उसका द्वार बिल्कुल चिकना था.खुद के नंगी होने पर उसने कहा – यह तो बड़ी गलत बात है.मैं – अरे क्या?वो – आपने मुझे तो नागा बाबा जी बना दिया और खुद आप बाबूजी बने खड़े हो.यह बात सुनकर हम दोनों ज़ोर से हँसे. अब असली चुदाई का दौर शुरू होने वाला था.















