मेरी गांड मारेगा। इसमें बड़ी खुजली हो रही है” मैं बोली.“कब???” वो बोला.“जब तेरा दिल करे!!” मैंने कहा.उसके बाद वो फौरन ही तैयार हो गया। उसे लेकर अपने घर में ले आई और कुतिया बन गयी। धर्मेन्द्र ने जल्दी जल्दी अपने वस्त्र उतारे और अपने लंड पर मुठ देने लगा। फेट फेटकर उसने अपना लंड खड़ा किया। फिर पीछे से आकर मेरी गांड के भूरे और बेहद सेक्सी छेद को चाटने लगा। चाट चाटकर मुझे गर्म करने लगा। उसी वक्त एक ऊँगली मेरी चूत में घुसा दी और अंदर बाहर करने लगा। इस तरह से अब गांड को चाट भी रहा था और चूत में ऊँगली भी एक साथ कर रहा था। काफी देर तक ऐसा किया उसने। फिर मेरी गांड पर तेल लगाया और अच्छे से मालिश कर दी।अब अपना 8” लंड घुसाने लगा। मैं हल्के दर्द से “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. हिंदी XXX .अई… उ उ उ उ उ…” बोलने पर मजबूर हो गयी। धर्मेन्द्र मेरी चूत में घुसा जा रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मेरा अंग अंग वासना और चुदास के नशे से भरकर मुझे आनन्द प्रदान कर रहा था। फिर धर्मेन्द्र अपनी ऊँगली चूत में घुसा दिया और अंदर बाहर करने लगा। अब तो मेरी ऐसी तैसी हो गयी और चूत में तरफ तरफ का अहसास होने लगा। मेरी चूत के गहरे चिकने छेद में बड़े















