तुझे ज्यादा तजुर्बा है तो तू ही राह दिखा!”और वो मेरे ऊपर आ गया। मैं सुरेश का लंड अपने हाथ में लेकर अपनी शादीशुदा प्यासी चूत जो हमेशा बुऱके में रहती थी उसका रास्ता बताने लगी। सुरेश का लंड मेरे हाथ में फूल रहा था और चूत के इर्द गिर्द जैसे जगह ढूँढ रहा हो। अब मैंने अपनी चूत के दरवाजे पर सुरेश का बालों से भरा अनकटा लंड जमाया और सुरेश को देख कर कहा, “सलमा इज़्ज़त शरीफ की शादीशुदा चूत के दरवाजे पर तेरे अनकटे लंड का सुपाड़ा तैयार है सुरेश!”सुरेश मेरी आँखों में भूखे कुत्ते की तरह देखते हुए अपने लंड का सुपाड़ा मेरी शादीशुदा इज़्ज़तदार चूत में घुसेड़ने लगा। मैं भी उसकी आँखों में देखते हुए उसके लंड के सुपाड़े को अंदर लेने की ख्वाहिश जता रही थी। सुरेश का लंड थोड़ा- थोड़ा करके मेरी इज़्ज़त को चोद रहा था।मैं सुरेश की पीठ पर अब अपने हाथ से उसके जिस्म को अपनी तरफ़ खींचने लगी। सुरेश का आधा लंड मेरी गोरी चूत में था और वो मेरी आँखों में मुसलसल देख रहा था और मैं उसके लंड को अपनी चूत में लेते हुए अपने चेहरे से ज़ाहिर कर रही थी कि “और डाल अपना लंड और मेरी चूत के अतराफ़ अपनी झाँटें गड़ा दे।”सुरेश ने अपना लंड थोड़ा सा पीछे किया और मेरी आँख मिलाते हुए बोला, “छिनाऽऽल















