मुझे गुल गुल लग रहा था.उफ्फ्फ्फ़कितनी मांसल चूचियां थी उसकी.उसने उत्तेजना में आँखें बंद कर ली और गपा गप ठुकाई का आनंद लिया। कुछ देर बाद मैं खुद को रोक ना सका। गोद में उठाकर पेलते पेलते उसकी चूत में मेरा माल निकाल दिया। जीजा की बहन अब चुद चुकी थी। अब मैंने उसे अपनी गोद से नीचे उतारा।“नवीन!! हिंदी XXX हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज वो निकाल रही थी।मुझे खुशी मिल रही थी। फिर मैं तेज तेज धक्के उसकी गांड में देने लगा। उफ्फ्फ्फ़ कितनी कसी और कुवारी गांड थी प्रतिभा थी। मैंने 40 मिनट उसकी गांड चोदी और माल भी उसे में गिरा दिया। मेरे जिस्म और मत्थे पर पसीना छूट गया था। उधर प्रतिभा भी हांफ रही थी। मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकाल लिया।वो अपनी गांड सहलाने लगी क्यूंकि अभी भी उसे दर्द हो रहा था। मैंने लंड को प्रतिभा के मुंह के सामने कर दिया और जल्दी जल्दी फेटने लगा। कुछ देर बाद मेरे लंड से फिर से 5 6 पिचकारी माल की निकली जो सीधा प्रतिभा के मुंह पर जाकर गिरी। वो बहुत चुदासी फील कर रही थी।मेरे माल को उसने मुंह में ले लिया और सारा माल पी गयी। ये वाली हम दोनों की अब तक की सबसे शानदार चुदाई थी। मैंने अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया। वो मजे लेकर से मेरा ९” का















