ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.और उसकी ज़बान मेरे होंठ खोल रही थी धेरे-२ और फिर अंदर घुस गयी तो मैं उसकी ज़बान की गरमी से पागल हो उठी और उस से लिपट गयी, मीरा ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे दोनो दूध दबाते हुए मेरे होंठ चूसने लगी ऊफ़ उसकी ज़बान इतनी चिकनी, गरम और इतनी लम्बी थी के मेरे पूरे मुंह में मचल रही थी और मेरे गले तक जा रही थी।हम दोनो के चेहरे पूरे लाल हो रहे थे और थूक से भीग चुके थे। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं भी उसका साथ दे रही थी और उसका प्यारा सा गुलाबी चेहरा हाथों में लेकर उसके होंठ और ज़बान चूस रही थी और सिसक रही थी आह अह मीरा अह अह हां अह अनूप मेरी जान, ऊफ़ मीरा कितनी मज़े की ज़बान है तेरी इतनी लम्बी ऊफ़ सच्ची रंजीत को मज़ा आ गया होगा.आअह ही धीरे अनूप अह आअह सच्ची अनूप बहुत मज़ा आया था क्या बताउं तुझे आह धीरे से मेरे होंठ। आह अनूप उठो न प्लीज अब, तो हम दोनो उठे तो फिर से मुझे लिपटा कर मेरे होंठ चूसने लगी और मेरे कुरते की ज़िप खोली और मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे मुंह में सिसकी उतारो न अनूप प्लीज और मेरे हाथ ऊपर















