या अभी भी हो सकता था।कुछ समय बीत गया था। घर के सारे लोग सो गए थे और बुआ के बगल में लेटी मेरी बहन भी। मैं भी शांत पडा हुआ आने वाले वक़्त के सपने देख रहा था। तभी चूड़ियों की खनखनाहट ने मुझे सपने से बाहर निकाला.. तेजी से करो..”पता नहीं गति परिवर्तन हुआ या नहीं लेकिन फूफा जी की आवाज़ आयी..“हहह.. हिंदी XXX बॉक्स पे मद्धिम आवाज़ में गाने बज रहे थे और अंदर मेहमानों की चहल-पहल थी। घर का मौसम खुशनुमा था और मेरा मन भी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मेरी श्रेणी अलग थी, मै काम करते हुए बीच-बीच में आराम करने वाले वर्ग में था और इसी आराम करने के लिए मैं जगह ढूंढ रहा था और इस बात का पूरा ख्याल रख रहा था कि मैं बुआ के आस-पास वाली जगह का ही चुनाव करू। मै बुआ के चुत को आराम देने के मूड में नहीं था, मै उसके कच्छी को लगातार गीली देखना चाहता था।मै उसके कामुकता पे लगातार चोट करना चाहता था ताकी वो थक कर टूट जाए। ढूंढते-ढूंढ़ते मै उस कमरे में पोहोंचा जहाँ बुआ बैठे हुए गप्पे लड़ा रही थी। बिस्तर पे जगह बची हुई थी पर उसपे बैठे लोग इस तरह बैठे हुए थे जिस कारण मैं कुछ नहीं कर पता। पर हार मारना मेरे वासना को















