मेरे पिता सुबह जल्दी घर से निकल जाते थे और देर रात लौटते फिर पीना शुरू करते और ढेर हो जाते उनकी शादी अब नाम मात्र को रह गई थी, ऐसा लगता था बस काम और शराब में ही उनकी जिंदगी गुजर रही थी.और माँ की बाकी ज़रूरतों को वे नज़रअंदाज करने लगे थे दोनों अभी भी बातें करते, हँसते पर उनकी जिंदगी में अब प्यार के लिए जैसे कोई स्थान नहीं था. हिंदी XXX ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.काफ़ी देर की चूमाचाटी के बाद माँ अलग हुई और बोली “अमित, बहुत देर हो गयी बेटे, अब घर चलना चाहिए” घर जाते समय जब मैं कार चला रहा था तो माँ मुझ से सट कर मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठी थी मैंने कनखियों से देखा कि उस के होंठों पर एक बड़ी मधुर मुस्कान थी.बीच में ही मैंने एक गली में कार रोक कर आश्चर्यचकित हुई माँ को फिर आलिंगन में भर लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा इस बार मैंने अपना हाथ उसके स्तनों पर रखा और उन्हें प्यार से टटोलने लगा माँ थोड़ी घबराई और अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी “अमित, हमें यह नहीं करना चाहिए बेटे”.मैंने अपने होंठों से उसका मुँहा बंद कर दिया और उसका गहरा चुंबन लेते हुए उन कोमल भरे हुए स्तनों को हाथ में लेकर हल्के हल्के















