रश्मि वहाँ नाइटी को दोनों हाथों से दबाए थी। किंतु इससे उसकी छातियाँ असुरक्षित रह गई थीं। मैंने उन पर हाथ लगाया।जैसे ही उसने स्तन बचाने के लिए हाथ उठाया, मैंने उसके पेड़ू पर जमा एकमात्र हाथ खींचकर हटा दिया। हाथ के साथ नाइटी भी खिसक गई और नंगा योनि-प्रदेश प्रकट हो गया। मैं उस पर झुक गया। वह जाँघें कसकर चिपकाए थी। उनके बीच भग-होंठ बंद थे। मैंने उसके नितम्बों को बाँहों में घेरा और भगों का उभार जितना हासिल हो सका उसी को चूमने-चाटने लगा। वह दाएँ-बाएँ पलटती बचने की कोशिश कर रही थी।मैंने चूतड़ों के नीचे हाथ घुसाया और जोर लगा कर दोनों जांघों को अलग कर दिया। तेज गंध का एक झोंका मेरे नथुनों में आया और मैंने रसीले आम की फाँकों पर मुँह लगा दिया। रोमरहित चिकनी, रस से छलछलाती फाँकें। वह एकदम से उछल पड़ी- जीजा जी, हटिए-हटिए, ये क्या कर रहे हैं।जिस तरह से वह रोक रही थी उससे लग रहा था वह मौखिक रति के सुख से अपरिचित थी। शायद मुकेश उसे उसे यह मजा नहीं देते थे। मैं जल्दी जल्दी चाटने लगा। वह उछलने लगी और हाथों से मेरा सिर ठेलने लगी, “छी छी जीजा जी, ये क्या कर रहे हैं… ओफ… ओफ… ये क्या कर रहे हैं जीजाजी… ओफ जीजाजी…”मैंने जीभ से टटोल कर उसका छेद खोज लिया था और उसके द्वार















